ताजमहल नही बल्कि तेजोमहालय है नाम देखिये कैसे इस सच्चाई को छुपाया गया हमसे ?

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आज जो विवाद हो रहा है कि शाहजंहा ने अपने प्यार के लिए ताजमहल बनवाया था तो आप खुद सोचिए कि जिसकी पत्नी 14वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी थी और उसके बाद शाहजंहा ने मुमताज के मरने के बाद उसकी ही बहन फिरोजा से शादी कर लिया और उसके राज्य में 7000 से ज्यादा रखैले थे तो अगर इसे प्यार कहते है तो फिर अय्याशी किसे कहते है आप खुद सोचिये ? आपको बता दे कि पिछले दिनों जबसे योगी जी ताजमहल जाके आये है तबसे ताजमहल को लेकर चर्चा और भी तेजी से शुरू हो गयी है|

लेकिन आज हम आपको बताते है कि आखिर कैसे तेजोमहालय का नाम ताजमहल रखा गया ? आपको बता दे कि आगरा के बारे में सबसे पहले आगरा का नाम अन्ग्रिया ऋषि के नाम पर पड़ा था और ऋषि इसी जगह रहते थे और वो भगवान शिव के सच्चे भक्त थे और आज जो ताजमहल हम देखने जाते है वहाँ हजारो साल पहले अन्ग्रिया ऋषि में शिव जी का मंदिर बनाया था जिसका नाम तेजोमहालय रखा था और ये नाम क्यों रखा था इसका भी उल्लेख हम करके आपको बताएँगे ?

जिस जगह भगवान का शिव का शिवलिंग था वहां हर पूर्णिमा कि रात को या फिर चन्द्र देव कि रौशनी उसपे पड़ती थी तो वह काफी चमकने लगता था | और 15वी सदी में जयपुर के राजा जय सिंह इस मंदिर में आये थे और उन्होंने इस मंदिर को एक भव्य मंदिर का स्वरुप दिया था जिसे आज लोग ताजमहल कहते है और इसका प्रमाण हा इतिहासकार जो कि हमें आज भी इनके बारे में बताते है |

और कहा जाता है कि जब मुमताज मरी थी तब उसकी याद में शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाया था लेकिन आपको बता दे कि मुमताज कि मृत्यु आगरा में नही बल्कि मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में हुई थी जहाँ आज भी बुरहानपुर किल्ला मौजूद है और यही वो किल्ला है जन्हा मुमताज रहा करती थी | और मौत के बाद उसे वही दफनाया गया था लेकिन अब आपको वो सबूत दिखाते है कि जब मुमताज जिन्दा थी उसके पहले ही ताजमहल बना हुआ था जो कि जयपुर के राजा जय सिंह ने वह भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवाया था |

ये है वह कमरा जहा मुमताज अपने 14वें बच्चे को जन्म देते वक्त उनकी म्रत्यु हुई थी और इसी कमरे में रंगीन संगमरमर से कई चीजो को बनाया गया है आपको बता दे कि मध्यप्रदेश के बुरहानपुर किले के कमरे बनवाया था जहा मुमताज रहा करती थी और जब मुमताज की म्रत्यु हो गयी तो उसके लाश को वही दफ़न कर दिया गया लेकिन शाहजंहा ने 2 साल बाद मुमताज के लाश को आगरा के तेजोमहालय ले आया और वहा जो भी मंदिर था उसे एक मकबरे कि शक्ल देकर सभी मंदिर के मूर्तियों को तोड़ तोड़ कर फेक दिया था |

और आपको बता दे कि 21 कमरों में आज भी वह मुर्तिया इस ईमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पड़ी हुई है और आपको जानकर हैरानी होगी कि जब राजा जय सिंह तेजोमहालय का निर्माण करवा रहे थे तब अन्ग्रिया ऋषि के पैरों के चिन्ह भी मंदिर में बनवाए थे जिन्होंने यहाँ अपने हाथो से शिवलिंग कि स्थापना की थी और मंदिर जर्जर स्तिथि में होने के कारण राजा जय सिंह ने और भी उसमे कई घोड़े और देवी देवताओं की मूर्तियाँ लगवा दी थी और आज भी इन बंद कमरों में वह मुर्तिया है जिसे मंदिर को शाहजंहा ने एक मकबरे का स्वरुप दे दिया था जो कि ये हमारा तेजोमहालय है |