जब युधिष्ठिर ने भीष्म से पूछा कि सहवास करते समय सबसे ज्यादा आनंद किसे आता है स्त्री या पुरुष ? भीष्म का जवाब आपके सोच से काफी अलग है पढ़िए

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आप सब ने महाभारत तो देखी होगी अगर नही भी देखी तो हम आपको बता देंगे आज आपको बता दे कि जब महाभारत का युद्ध चल रहा था और जब अर्जुन ने अपने बाणों से पितामहः भीष्म को बाणों कि सरिया पर सुला दिया था उस समय युधिष्ठिर पितामहः के पास गये और उनसे पूछा कि पितामहः सहवास करते समय सबसे ज्यादा आनंद किसे आता है स्त्री या पुरुष तो पितामहः ने जवाब में उन्हें एक कहानी सुनाई और इसी कहानी में छुपी है ये सारी बाते तो आइये जानते है आखिर क्या जवाब दिया पितामहः ने ?

फिर पितामहः ने युधिष्ठिर को कहानी सुनना प्रारंभ किया और वो कहानी का शीर्षक था राजा भंग स्वाना और शकरा की कहानी, एक समय की बात है जब राजा भंग स्वाना हुआ करते थे और आपको बता दे कि ये राजा बहुत ही दयालु और न्याय प्रिय थे और प्रजा भी इनसे काफी खुश थी  लेकिन उसके घर कोई पुत्र नही था और इसी के उपलक्ष में राजा ने एक यज्ञ का अनुष्ठान किया और इस यज्ञ में सिर्फ अग्नि की स्तुति करने के कारण देवराज इंद्र नाराज हो गये और उन्होंने मन में ठान लिया कि वो राजा भंग को बरबाद करके रहेंगे |

लेकिन राजा भंग इतने दयालु और शांत स्वाभाव के थे कि उनसे कोई गलती ही नही होती थी और यह सब देख इंद्र जी और आग बबूला हो उठे और वे ऐसे मौके के तलाश में थे कि जिसमे राजा कि कोई गलती निकले लेकिन इंद्रा को ऐसा कोई अवसर प्राप्त नही हुआ लेकिन एक दिन जब राजा जंगल में शिकार के लिए निकले तो उस दिन इंद्र को आखिरकार मौका मिल ही गया और तुरंत इंद्र ने राजा को अपने शक्ति के कारण सम्होहित कर लिया जिसके वजह से राजा को कुछ भी समझ में नही आ रहा था कि वह करें तो क्या करें ?

सम्मोहन के बाद अब राजा को न अपनी सेना दिखाई दे रही थी औ न ही कुछ याद आ रहा था अब राजा करे भी तो क्या करे वह एक दिशा में बढ़ते चले जा रहे थे और फिर उन्हें पास में एक नदी दिखाई दी जहा जाकर वह पानी पिए और जैसे ही राजा ने उस नदी का पानी पिया राजा धीरे धीरे स्त्री का रूप धारण कराने लगे और देखते ही देखते वह पूरा स्त्री के रूप में आ गये और यह देख राजा दुखी हो गये कि अब वो अपने राज्य कैसे जायेंगे और अपने पत्नी को क्या मुह दिखायेंगे लेकिन वह अपने राज्य गए और अपने सभी मंत्री मंडल को एकत्रित कर उनसे कहा कि मै अब इस राज्य के काबिल नही रहा अब मै जा रहा हूँ |

और यह सब कहने के बाद राजा जंगल की ओर चल दिए और जंगल में जाने के बाद एक ऋषि के साथ अपना घर बसा लिया और कुछ सालों बाद स्त्री रूप में हुए राजा के कई पुत्र हुए और अपने इन पुत्रो को लेकर राजा फिर अपने राज्य में पंहुचा और कहा अब आप इस राज्य को संभालो और यह सब देख इंद्र और क्रोधित हो गये कि आखिर ये इतना खुस कैसे रहा लेता है और इंद्र सोचने लग गये कि आखिर मेरे श्राप का इनपे कोई असर नही हुआ ये स्त्री रूप में और खुस लग रहे है | अब इंद्र ने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और उसके राज्य में आ गये और सभी भाइयों को भड़का कर एक दूसरे के खिलाफ करवा दिया तब जिसके चलते सभी भाइयों ने एक दूसरे की हत्या कर दी |

लेकीन जब स्त्री रुपी भंग स्वाना को यह पता चला कि उसके सारे पुत्रों की मौत हो गयी है तब वह रो- रो कर विलाप करने लगी| उस वक़्त देवराज इंद्र ब्राह्मण के रूप में स्त्री रुपी राजा के सामने प्रकट हुए और उनसे पूछे कि तुम क्यों रो रही हो? जवाब में राजा ने बताया कि मेरे सारे पुत्रों की हत्या हो गयी है| राजा की ऐसी बात सुनकर इंद्र ने अपना असली रूप स्त्री रुपी राजा के सामने दिखाया और उसने कहा कि तुमने सिर्फ अग्नि का अनुष्ठान किया और मेरा अनादर किया इसलिए तुम्हें यह कष्ट भोगने पड़ रहे हैं| ऐसा सुनकर भंग स्वाना इंद्रा के चरणों में गिर गई और उनसे अपनी अनजाने में की गई भूल की क्षमा मांगी| राजा का ऐसा हाल देखकर इंद्र को भंग स्वाना पर दया आ गयी और राजा दे कहा तुम कौन से पुत्र का जीवनदान चाहते हो ?

फिर राजा ने कहा मै उन पुत्रो को जीवित करना चाहता हु जो मेरे स्त्री रूप में हुए है राजा का यह जवाब सुन कर इंद्र ने पूछा तुम ऐसा क्यों चाहती हो तब राजा भंग ने कहा स्त्री का प्रेम पुरषों के प्रेम से कई गुना ज्यादा होता है इसलिए मै अपने इन पुत्रो को जीवित देखना चाहती हु |राजा कि इस बात को सुनकर इंद्र को दया आ गयी और वह उनके सारे पुत्रो को जीवित कर देते है और उसके बाद जब इंद्र ने राजा भंग का श्राप वापस लेना चाहा तो राजा ने कहा ?

हे इंद्र देव मै स्त्री रूप में ही रहना चाहती ही और यह सुनकर इंद्र कि उत्सुकता और बढ़ गयी इंद्र ने पूछा वो क्यों तब स्त्री रूप राजा ने कहा कि मैंने स्त्री रूप में यह जाना है कि सहवास करते समय स्त्री को पुरुषों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आनंद प्राप्त होता है इसलिए मै स्त्री रूप ही रहना चाहती हु | उसके बाद पितामहः ने युधिष्ठिर से कहा सहवास के समय पुरुष के मुकाबले स्त्री को कई गुना ज्यादा आनंद और संतुष्टि प्राप्ति होती है |