भीमा कोरेगांव का एक ऐसा विडियो जिसे शायद ही किसी ने देखा हो देखिये जानिए आखिर क्या है इतिहास?

0
87

आज कल महाराष्ट्र में एक ऐसी घटना उभर चुकी है को रुकने का नाम ही नहीं ले रही 200 वर्ष पूर्ण होने का जश्न कैसे बदल गया और ले लिया इतना विराट रूप चलिए आपको बताते है | आपको बता दे की दो जाति के लोग एक दुसरे के दुश्मन बन बैठे है और उनके इस दुश्मनी की आग में पूरा देश झुलश रहा है तो चलिए जानते है की आखिर क्या है इसका पूरा सच | यह मामला 200 वर्ष पुराना है पुणे शहर जिसे 200 वर्ष पहले पुना कहा जाता था और 1 जनवरी 1818 को पूना के भीमा कोरेंगांव नाम की जगह पर बाजीराव पेशवा द्वितीय की सेना अंग्रेजो से लोहा लेने के लिए चल पड़ी थी और उन्हें रोकने के लिए अंग्रेजों ने अपनी सेना की एक टुकड़ी भेजी थी और इस टुकड़ी में अंग्रेज के साथ साथ ज्यादातर महार जाति (दलित) के लोग शामिल थे |

और यह बात सही है की उन्होंने पेशवा बाजीराव की सेना को रोक रखा था आगे जाने नही दिया था और इस युद्ध में पेशवा की सेना को अंग्रेजों की सेना के आगे पीछे हटना पड़ा था और इस युद्ध को महारों ने दलित बनाम उचीं जाति का बना दिया |

और आपको सच्चाई बता दे तो इसमें अंग्रेजो की जीत हुई थी महारों की नही और ना ही इतिहास में महारों का सम्राज्य का जिक्र है जिसे बचाने के लिए वो मैदान में उतरते थे | और वो अंग्रेजों के सिपाही थे जो की उन्ही के लिए लड़ते थे और अगर उस समय ये हारते तो अंग्रेजों की हार होती और जीतते तो अंग्रेजों की हार होती |

लेकिन उस समय अंग्रेज जीते और उस समय का शासन भी अंग्रेजों ने किया इन महारों ने नही और उस युद्ध के बाद भी उस अंग्रेजों की जीत का जश्न आज भी मनाया जा रहा है और इसीलिए हर साल की पहली तारीख को भीमा कोरेगांव में बने एक स्मारक पर बड़ी संख्या में दलितों का जमाव होता है और इस बार 1 जनवरी 2018 को इस युद्ध को 200 साल पुरे हुए थे |

और देशभर से लाखों की तादाद में दलित समाज के लोग इस कार्यक्रम में शामिल होते है लेकिन देखते ही देखते इस जश्न का आग इतना फ़ैल गया की यह आज एक हिंसा का रूप ले लिया है | ओरिस हिंसा के होने से एक रात पहले यानी की 31 दिसम्बर 2017 को पुणे में गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और देशद्रोह का आरोप झेल रहे उम्र खालिद भी गये हुए थे |

लेकिन क्या हुआ उसके बाद आपको बता दे कि महार जाति के लोग यह जश्न इस यह समझ कर मनाते है की उन्होंने उचीं जातिं वालों को हरा दिया था लेकिन सच यह है की महार जाति के लोग अंग्रेजों की सेना में शामिल थे और वही पेशवा बाजीराव की सेना अरब मुस्लिम, मराठा और गोसाई जाति के लोग शामिल थे और इसका पूरा पुख्ता तब होगा जब आप इस विडिओ को देखेंगे |

देखें विडिओ:-

हम आपको एक सोशल मिडिया द्वारा प्राप्त जानकारी को आप तक पहुचाने की कोशिश की है अब आप ही बताइए की यह जश्न देश के हित में है या देश के विरुद्ध और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कर सभी लोगो तक सच्चाई पहुचाने में हमारा साथ दे |