आखिर क्या है भारत के आखिरी गाँव कि सच्चाई? क्यों कहते है इसे एक चमत्कारी गाँव ?

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वैसे आपको तो पता ही होगा हमारे भारत में एक से एक प्राचीन काल कि वस्तुए और कई अलग अलग धर्मो का जन्म हुआ है | और ऐसे ही अनेको रहस्य आज भी दबे हुए जिसे शायद ही लोग जानते होंगे लेकिन आज हम आपको भारत से ही जुड़े कुछ रहस्य मई चीजो से अवगत कराने वाले है वैसे तो भारत को पहले सोने कि चिड़िया नाम से भी बुलाते थे लेकिन धीरे धीरे समय के अनुसार सब बदलते गये | लेकिन आज हम आपको भगवान शिवजी से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में आपने आज तक नही सुना होगा | आपने कभी सुना है भारत का आखिरी गाव नहीं न लेकिन आज हम आपको इसी गाँव कि सच्चाई बताने जा रहे है आखीर क्या है इस गाँव कि मान्यता और क्यों इसे किस्मत और चम्ताकारो कि पूंजी वाला गाँव कहा जाता है और क्यों इसे शिवजी का वरदान वाला गाँव कहा जाता है | आपको बता दे कि यह गाँव उत्तराखंड के चमोली जिले में स्तिथ है और इस गाँव का नाम है माणा | आइये जानते है इस गाँव का पूरा रहस्य ?

आपको बता दे कि यह भारत का आखिरी गाँव है और आपको यह भी बता दे कि आर्थिक तंगी से परेशान लोगो के लिए ये गाँव किसी चमत्कार से कम नही यहाँ पर एक मान्यता प्रसिद्द है कि चमोली जिले में स्तिथ माणा नाम का ये गाँव है बद्रीनाथ धाम से लगभग 3 किलोमीटर दुरी पर बसा हुआ है और यह भी कहा जाता है कि इस गाँव में प्रवेश करते ही शिवजी कि कृपा दृष्टि पड़ जाती है और उसकी कोई भी परेशानी हो पल भर में दूर हो जाती है |

अब आपको एक और चौकाने वाली बात बताने जा रहे है दरअसल यह गाँव का नाम भगवान शिव के सच्चे भक्त मणिभद्र देव के नाम पर रखा गया है और इसके पीछे एक ऐसी धरना जुडी है कि यह गाँव श्राप मुक्त है और जो भी इन्सान यहाँ आता है उसके सारे पाप दूर हो जाते है और आपको बता दे कि गाँव में प्रवेश करते ही सबसे पहले गणेश गुफा नजर आती है माना जाता है कि गणेश जी जब वेदों कि रचना कर रहे थे तब इसी जगह पे आये थे |

एक कथा के मुताबिक़ सरस्वती नदी के तेजी से बहने के कारण बहुत शोर हो रहा था जिसके कारण गणेश जी का ध्यान भटक रहा था और गणेश जी ने सरस्वती नदी से शोर कम करने का आग्रह किया लेकिन वह नही मानी जिससे गणेश नही उन्हें श्राप दे दिया था कि इस जगह के बाद सरस्वती नदी कीसी को नजर नही आएगी और यही कारण है कि सरस्वती नदी कुछ दूर जाकर अलकनंदा से मिल जाती है जिसके बाद वह नजर नही आती |