15 अगस्त को मोदी जी ने किया अस्पतालों पर सर्जिकल स्ट्राइक पढ़िए अब कैसे होगा इलाज..?

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वैसे आपको तो पता ही होगा कि जबसे मोदीजी ने नोटबंदी का फैसला लिया है तबसे लोगो का मोदीजी के ऊपर भरोसा और भी बढ़ गया है और इतने बड़े फैसला लेने के बाद अब फिर मोदीजी ने जबसे GST का फैसला लिया है तबसे कुछ व्यापारी तो खुश नही है और ये वही लोग है जो टैक्स भरने में सोचते है आखिर ये भी एक बार फिर ऐसा बड़ा फैसला लेने के बाद नेताओ कि काली कमाई पर पूरी तरह से बैन लग गया है | और इससे हो रही मनमानी कमाई करने वाले अस्पतालों पर भी रोक लगाने जा रहे है मोदीजी ने |

खुशखबरी : अब हॉस्पिटल नहीं ले सकेंगे मनमानी फीस
अभी-अभी बहुत बड़ी खुशखबरी आ रही है दिल की बीमारी में लगने वाले स्टेंट को आम आदमी की पहुँच में लाने के बाद अब घुटने की सर्जरी के लिए हॉस्पिटल मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे. सरकार ने ऑपरेशन के जरिए घुटने की सर्जेरी की कीमतों को ज़बरदस्त तरीके से घटाते हुए कीमते निर्धारित कर दी है. इसका मतलब अब हॉस्पिटल आप से मनमाने ढंग से पैसे नहीं ऐंठ सकेंगे. अभी से इस फैसले से देशभर के लोगों ने सोशलमिडिया में जमकर तारीफें हो रही हैं|
करोड़ों छापने का धंधा बना रखा था इसे
केंद्र सरकार की ही एक संस्था एनपीपीए ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि इस व्यापार में इतना अधिक फायदा उठाने का मौका रहता था कि डिस्ट्रीब्यूटर और अस्पताल दोनो मरीजों से केवल एक सर्जरी के कई लाखों रूपए मनमाने ढंग से वसूलते हैं जिससे इसे एक करोड़ों का धंधा बना के रख दिया है|


पीएम मोदी ने बंद कर दी दुकान
केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने पीएम मोदी का संकेत पाते ही फैसला ले लिया लेकिन ऐलान होने के पहले तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी. मोदी सरकार को ये डर था की खबरें फैलीं तो एक बड़ा विरोधी तबका इस फैसले को रोकने में लग जाएगा क्योंकि इस फैसले से उस वर्ग के लोगों को तगड़ा झटका लगेगा जो करोड़ों रूपए छाप रहे हैं इसको धंधा बना कर|
बचेंगे 1500 करोड़ रूपए
आपको बताते चलें भारत में हर साल एक से डेढ़ लाख लोग घुटने की सर्जरी करवाते हैं. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से घुटनों की सर्जरी करवाने वाले लोगों को अब इस फैसले से भारी भरकम 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी. लेकिन अभी भी कुछ मोदी विरोधी नेता बैंक खाते में 15 लाख रूपए का रोना पीटते रहते हैं. अभी तक देश में 80 से 90 फीसदी इंप्लांट का बाजार विदेशों से आयात के सहारे चलता है जिसके चलते भारत का उद्योग जगत बड़ी विदेशी कंपनियों के मुकाबले कमज़ोर रहता है. मोदी सरकार भी मानती है कि कीमतों निर्धारित करने से देशी बाजार में बड़ा सुधार आएगा|


MRP पर 70 फीसदी की बड़ी ज़बरदस्त गिरावट
बहरहाल इस फैसले के बाद उन रोगियों ने राहत की सांस ली होगी जिनके लिए इस सर्जरी की भारी कीमतों को चुकाना बहुत मुश्किल होता था. इस फैसले के आने से पहले तक प्रतिरोपण के लिए देश के बड़े अस्पताल 2 लाख 75 हज़ार से लेकर 6 लाख 50 हज़ार तक मोटी रकम वसूलते थे. लेकिन अब एमआरपी पर सीलिंग लगाते हुए सरकार ने इसकी कीमत मात्र 76600 रूपए यानि कि 70 फीसदी तक कीमत को घटा दिया है|
तो वहीँ घुटने का इंप्लांट कोबाल्ट क्रोमियम जिसकी एमआरपी पहले 2 से 3 लाख तक मोटी रकम वसूली जाती थी उसके लिए अब केवल
54720 रूपए ही देने होंगे यांनी कि 65 फीसदी तक की बचत. फ्लेक्सिबिलिटी इंप्लांट की कीमत 1,81,728 रुपये थी. अब 69 फीसदी की कमी के बाद इसकी कीमत 56490 रूपए कर दी गयी है. सबसे ज़्यादा राहत कैंसर के मरीजों को मोदी सरकार ने दी है. कैंसर और ट्यूमर के लिए विशेष इंप्लांट की कीमत 9 लाख तक ली जाती थी. इसकी कीमत अब केवल 113950 रुपये दी है|


फैसला न मानने वालों पर चलेगा डंडा
केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने चेतावनी दी है कि किसी ने भी अगर इस फैसले के बाद मनमानी वसूली करी तो उनसे न सिर्फ 18 फीसदी ब्याज दर से पैसा वसुला जाएगा बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और अस्पतालों के खिलाफ क्रिमिनल कारवाई भी करी जाएगी |