राँझना 2:- जोया और कुंदन की प्रेम कहानी एन इंजिनियर की जुबानी पार्ट-1

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    जून के दुपहरी में ज़ोया जब तीन बार सूखे हुए कपड़े को ही पलट पलट के सुखाने के लिए छत पर आई और कुंदन नही दिखा तो उसने मन ही मन सोचा की इस सातवी क्लास के इश्क़ में और कुछ भले हो न हो चमड़ी इतनी काली जरूर हो जाएगी कि जिंदगी भर फेयर लवली पोतने से भी उजली नही होगी। जब उसने कपड़ा पलट लिया और वापस मुड़ते हुए खंभे पे बिजली का बल्ब जलते देखा तो मन ही मन सन्नी देओलवा के लिए एक भद्दी सी गाली निकाली। जब भी उसका पिक्चर टीवी पे आता था मजाल है की कुंदनवा कहीं बाहर निकल जाए। पिछली बार तो हद हो गई जब ज़ोयवा ने कुंदन से पूछा कि हमको और सन्नी देओल में से किसी एक चुन लो वरना अब्बू जिससे ब्याहेंगे, जिसका बारात लेके आएंगे, उसके साथ ही हम चले जायेंगे।

     


    और दिन होता तो कुंदनवा , सारी दुनिया की दौलत छोड़के ज़ोयवा को चुनता मग़र आज उसने घातक देख रखी थी। शायद इसलिए सन्नी देओल की तरह अकड़ा और एक हाथ बढ़ा सीधे उसका का हाथ पकड़ लिया और गुर्राया की तुम हमारी जान हो और सन्नी देओल सांस। कम बोल रहे है ज्यादा समझो ………जान तभी रहेगी जब सांस चलेगी। ज़ोया कुछ कहने के लिए मुंह खोलती तब तक उसने दूसरे हाथ उसके मुंह पे रखा और आहिस्ते से उसके कान में बोला” पूरी बरात की बरात मारूँगा, दुल्हे के अब्बू और दूल्हे को एक साथ मारूँगा।”
    उस वक्त ज़ोया को थोड़ा यूँ हाथ पकड़ना अटपटा तो लगा मगर उसने ऐसे हक से पकड़ा था कि ज़ोया ने हटाना मुनासिब नही समझा। फिर उस वक्त जब कान में बात करते हुए कुंदन का होंठ उसके कान से टच किया तो उसकी पूरे शरीर मे अजीब सा सिहरन हुआ था। कुन्दनवा भी शांत हो गया था उस वक्त।

    उस सिहरन को याद कर ज़ोया खुद में ही शर्माई तब तक नीचे से अम्मी चिल्लाई की जाओ कुंदन के घर से जो कटोरी आई है उसे वापस कर आओ और सुनो खाली कटोरी मत ले जाना , सब्जी लेते जाना।
    ज़ोया जब कुन्दनवा के यहा सब्जी लिए घुसी तो वो टांग पसारे सन्नी देओल का डकैत देख रहा था। उधर आंटी पूजा घर मे पूजा कर रही थी , ज़ोया के आवाज देने पे बैठे बैठे आवाज दी कि किचन में रख दो।
    ज़ोया ने सब्जी रखी और किचन से सीधे कुंदन के कमरे के तरफ घूमी वहां दो पल को उसको घूरते हुए बाहर निकल गई।

    कुन्दनवा मन ही मन सोचा कि आज क्यों आग बबूला हो गई। आज तो उसको तंग भी नही किया जब वो कपड़ा सुखा रही थी ।खैर उसके घूरने का असर हुआ । वो भागते हुए छत पे चढ़ा और ज़ोयवा को सिग्नल देने के लिए रेडियो का वोल्युम फूल कर दिया। तीखी आवाज कान में पड़ने के साथ ही ज़ोया छत पे भागी और कुन्दनवा को देख के मुंह फेर ली। हुलस के कुन्दनवा ने पूछा “अब क्या हुआ, काहे घूर रही थी”। ज़ोया आंख मटकाते हुए बोली ,”हम क्यो घूरे किसी को, हम तो बचपन से ऐसे ही देखते हैं। कुन्दनवा ने सोचा कुछ रोमांटिक बात करके मनाते है मगर था तो वो सन्नी देओल का फैन ही इसीलिए सीधे बोला ,” ये कांधे के ऊपर से दुप्पट्टा लाके कमर में बांधना बन्द करो, देख कर कुछ-कुछ करने का मन करता है , फिर कहते है तो तुम गुस्सा हो जाती हो।” ज़ोया ने आंखे तरेरी और कुन्दनवा को घूरती हुई बोली कि आज से अगले तीन दिन तक मुझसे बात मत करना , और बात नही करने का मतलब है कॉल से भी नही और sms से भी नही। अब जाओ देखो अपना सांस का फ़िल्म।

    इतना कहकर वो नीचे भागी । दो मिनट तक वहीं शांति से खड़ा रहने के बाद जब कुन्दनवा वापस मुड़ा तो उसके पाकिट मे पड़े सिक्के खनखनायें । पाकिट से उसने सिक्के निकाले और मुठी में भींच कर सोचा “चलो अब कुछ दिन आइसक्रीम और गोलगप्पा का खर्च बचेगा।”