गौ रक्षको को गुंडा कहने वालो के मुंह पर जोरदार तमाचा है ये पोस्ट, जरुर पढ़े

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गाय क्या है? औरों के लिए कुछ नही है मगर हमारे लिए आस्था से भी बढ़कर अस्मिता का प्रतीक है। हमने अपने सनातन धर्म में एक पूरी की पूरी अहीर/ग्वाल जाति ही……गायों के लिए बनाई हुई है। गाय के लिए त्याग भी इतना किया है की
सोमनाथ से लेके……. मुगल बादशाहों की लड़ाई में……… हमारे पूर्वजों के आगे गायों की झुण्ड खड़ी कर दी गई और उन्होंने गायों को मारने के बजाय खुद मरना पसंद किया। प्रभु राम के पूर्वज महाराजा दिलीप सिंह से लेके शिवाजी महाराज तक की वीरता से परिपूर्ण गौरक्षा का इतिहास रहा है हमारा । महाराज सुहलदेव पासी इसमें चार चांद लगाते है कल अलवर में वहशी भीड़ ने एक गौ तस्कर की हत्या कर दी …. सेक्युलरों को छोड़िये…..कुछ राष्ट्रवादीयों के स्तन से भी दूध उतर आया है …..उन्हें अब हर गौ-रक्षक गुंडा लगने लगा है ,और गौरक्षा गुंडागर्दी।

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ये सब बचकानी हरकते बन्द कीजिये महाशय …… ये लड़ाई………अब धर्म से आगे की बढ़ चुकी है , अब यह अस्तित्व की लड़ाई है। अगर आपको इसमें सर्वाइव करना है। तो कभी कठोरता अपनानी पड़ेगी, कभी कुछ चीजों को नजर अंदाज करना पड़ेगा। अगर किसी दूसरे को डॉ नारंग की मौत नही मरना है तो किसी को दादरी का विशाल बनना होगा। आज जब सामने खड़े भेड़िये को अगर भेड़ो ने मार दिया तो अप्रसियेट कीजिये …..प्रशस्तिगान कीजिये ……..अगर ये सब नही कर सकते तो चुप रहिये। क्योंकि अरुण माहौर, डॉक्टर नारंग के वक्त वे भी चुप थे। हजार से वर्षो से लगातार जख्म खाते रहने के बाद पहली बार समाज हमलावर हुआ है। थोड़ा पर खोलने का मौका दीजिये ……इतिहास की गंदगी मिटाने दीजिये। अबकी जो बारिश हो उस में बरसों पुराने जो कीचड़ लगे हैं ……उन्हें धो दीजिये। सभ्यता को जंग लगने से बचाइए। अपने स्तन का दूध समेटकर रखिये आगे बहुत काम आएगा। नही तो ऐसे लक्षणों से लग् रहा है आधे राष्ट्रवादी…..विधर्मियों द्वारा मारने से मर जाएंगे और आधे राष्ट्रवादी जब कोई विधर्मियों को मार देगा तो उसके अपराधबोध से मर जायेंगे।